संगठन

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संगठन समाज की रीढ़ होती है। उसके बिना समाज में सुव्यवस्था नहीं रह सकती। अतः तेरापंथी संस्थाओं के बीच पारस्परिक संपर्क विकसित करने हेतु 1956 में ‘सभा संगठन विभाग’ निर्मित किया गया। इस विभाग की निम्नलिखित योजनाएं थीं-

  1. (अ) समस्त तेरापंथी संस्थाओं का महासभा के साथ संपर्क स्थापित करना एवं उन संस्थाओं के कार्यकर्ताओं एवं प्रवृत्तियों का एक पूर्ण रिकॉर्ड महासभा में रखना। (ब) भारत के प्रत्येक स्थान में जहाँ सौ से अधिक तेरापंथी हों वहाँ तेरापंथी सभाएं स्थापित करने का प्रयास करना।
  2. समस्त तरपंथी बंधुओं की गणना करना जिससे यह ज्ञात हो सके कि किस क्षेत्र में कितने तेरापंथी हैं।
  3. ऐसी व्यवस्था करना कि कार्यकारिणी में संभाव्यतया भारत स्थित समस्त तेरापंथी सभाओं का प्रतिनिधित्व हो सके।
  4. अधिकाधिक जैन पुस्तकालयों की स्थापना करना।
  5. स्वाध्याय शाला स्थापित करना।

महासभा ने इसके लिए देशव्यापी संगठन यात्रायें शुरू कीं। इस विभाग ने 19, 20 जनवरी 1983 को नाथद्वारा में बृहद श्रावक सम्मलेन आयोजित किया।